Gurde ki pathri ka gharelu nuskha
गुर्दे (kidney) की पथरी चाहे जितनी भी बड़ी हो, हमें उसका ऑपरेशन कराने से बचना चाहिए। ऑपरेशन की जगह हम उस
पथरी का इलाज होम्योपैथिक या आयुर्वेदिक तरीके से कर सकते हैं।
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| courtesy: Wikipedia |
आयुर्वेदिक ईलाज (Kidney stone ki ayurvedic dawa) :-
हमारे भारत में पाषाणभेद नाम का एक पौधा होता है, जिसे कुछ जगह पर पत्थरचटा नाम से भी जाना जाता है। इस पत्थरचटा के 2 पत्तों को पानी में उबालकर इसका
काढ़ा बना लें। अब इस काढ़े को पी लें। इस काढ़े को दिन में ज्यादा से ज्यादा 3 बार और कम से कम 2 बार जरूर लेना है। यह औषधि 1-2 हफ़्तों में पथरी को पूरी तरह से खत्म कर देती है। एक बात का ध्यान रखें की पथरी के मरीज को ज्यादा से ज्यादा पानी पीना चाहिए। जिससे पथरी टूट कर
मूत्र के रास्ते बाहर आ सके।
होम्योपैथिक ईलाज ( Kidney stone ki dawa ):-
होमियोपैथी में "Berberis Vulgaris - mother tincher" नाम से एक दवाई आती है। इस दवाई को आप किसी भी
होमियोपैथी की दुकान से खरीद सकते हो। यह दवाई भी पत्थरचटा से बनी है। पत्थरचटा का बोटैनिकल नाम Berberis Vulgaris ही होता है। इस दवाई की 10-15 बूंदे एक चौथाई गुनगुने पानी में मिलाकर दिन में कम से कम 3 बार और ज्यादा से ज्यादा 4 बार लेनी हैं। यह दवाई लगातार एक से 2 महीने तक लेनी ह। कई बार
पथरी को पूरी तरह टूट कर निकलने में 2 से 3 महीने भी लग सकते हैं। इसलिए आप 2 महीने बाद पथरी के टेस्ट करा के चेक कर सकते हैं। अगर पथरी अभी पूरी तरह से टूट कर न निकली हो तो कुछ दिन और इस दवाई को खा सकते हैं क्यूंकि इस दवाई का कोई side-effect नहीं है।
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